कल देर रात तक क्यों मुझे जगाते रहे
मेरे दिल में हज़ारों ख़याल आते रहे
दिल हुआ तुम्हारे हाथ को चूम के किस्मत की लकीरें बदल दूं
दिल हुआ तुम्हारे साथ चाँद के मुल्क तक चल दूं
बेसबब आँखों से आँसू बहने लगे यूँ लगा दबे पाओं आए
तुम दिल में रहने लगे फिर बेसबब आँख से आँसू क्यों बहे?
क्या कहे कैसे कहे?
शाएेद तुम्हारे अल्फ़ाज़ में तुम्हे देखा तुम्हारी आमद की ख़ुशी थी
या शायद तुम्हारे खोने से डर लगता था अजीब रात थी
मुझे सोने से डर लगता था
मैं तुम्हारे सपानो के साथ जागना चाहता था
मैं सुबह की हक़ीक़तों से दूर भागना चाहता था
मैं तुम्हारे ख़यालों में रहना चाहता था
मैं बार बार तुम से कहना चाहता था
कई मैं तुम से प्यार करता हूँ
तुम्हे ही लिखता हूँ तुम को ही पढ़ता हूँ
तुम ही कश्ती की तरह बहती हो जब ये आँखें भारता हूँ
तुम कश्ती हो इसी लिए आज की रात बस रोना चाहता हूँ
ना रतज़गा चाहिए ना सोना चाहता हूँ
चँद लम्हों को मेरी हो जायो चँद लम्हों को तुम्हारा होना चाहता हूँ
अब तक तुम ने सुलझाई हैं ज़ुल्फ़ें अपनी
आज मैं वहाँ अंगुलियाँ पिरोना चाहता हूँ
आज इतनी ख़ुशी है दिल में की रोना चाहता हूं
आज तुम्हे पाना चाहता हूँ आज ख़ुद को खोना चाहता हूँ
आज की रात बस एक बार आयोगी ना?
मैं खो जाना चाहता हूँ तुम मुझे छिपयोगी ना?
आज की रात बस एक बार मुझे अपना प्यार बतायोगी ना?
आज बस एक रात मुझे लोरियाँ गा के जगयोगी ना?
मैं तुम्हारी आवाज़ के साथ जागना चाहता हूँ
बस एक आज मुझे दे दो मैं हर कल से दूर भागना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ क़यामत तक जागना चाहता हूँ
मैं तुम्हे तुम से माँगना चाहता हूँ
चँद लम्हों के लिए तुम्हे पाना चाहता हूँ
एक बार तुम्हारी बाहों में आना चाहता हूँ
एक बार तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम से पूछना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम्हे बताना चाहता हूँ
एक बार बस एक बार
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Friday, June 22, 2007
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