मैं नहीं मानता कि कोई भी व्यक्ति अपने बारें में पूरी तरह तथा निरपेक्ष रूप से कुछ बता सकता है। इसलिये मेरे बारे में जानने के इच्छुक लोगों को मेरे मित्रों या परिचितों से संपर्क करना चाहिये, क्योंकि वही शायद मेरे बारे में कुछ हद तक सही-सही बता पायेंगे। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मैं खुद को अधोलिखित पँक्तियों के द्वारा अभिव्यक्त करना चाहूँगाः ............ औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में कुछ लोगों का सीधापन है कुछ अपनी अय्यारी है। जो चेहरा देखा वो तो तोडा नगर नगर वीरान किये पहले औरों से नाखुश थे अब खुद से बेजारी है। ................... चिठ्ठाजगत में शामिल होने में मेरा मन्तव्य महज़ अपनी कविताएं लोगों तक पहुँचाना ही नहीं है, बल्कि कुछ समान विचारधारा वाले मित्रों का सान्निध्य प्राप्त करना भी मेरे इस प्रयास का हेतु है। क्योंकि मेरे विचार में मित्रता सभी रिश्तों का मूल आधार है। ............................... बादशाहों की मुअत्तर ख्वाबगाहों में कहाँ वह मजा जो भीगी भीगी घास पर सोने में है। मुतमईन बेफिक्र लोगों की हँसी में भी कहाँ लुत्फ जो इक दूसरे को देख कर रोने में है।