Saturday, September 1, 2007
Tuesday, August 7, 2007
DIL KA DARD
तेरी दिल्लगी को मुहब्बत समझता रहा
खाये पत्थर बहुत फ़िर भी हँसता रहा।
जो भी आया जज़्बातों की गर्मी दे गया
मोम का दिल था पिघलता रहा।
क्या ख़बर थी एक दिन ये हालत होगी
बैठ, किस्मत पे अपनी रोता रहा हँसता रहा।
ज़रूर किसी बादल का दिल टूटा है
सारी रात आज पानी बरसता रहा।
सारे भरम टूट गये जब नज़र फेर ली तुमने
जिनके बूते पे मुहब्बत का दम भरता रहा।
जा लौट जा झूठा था उसका वादा
उस आशिक से दरिया ये कहता रहा।
खाये पत्थर बहुत फ़िर भी हँसता रहा।
जो भी आया जज़्बातों की गर्मी दे गया
मोम का दिल था पिघलता रहा।
क्या ख़बर थी एक दिन ये हालत होगी
बैठ, किस्मत पे अपनी रोता रहा हँसता रहा।
ज़रूर किसी बादल का दिल टूटा है
सारी रात आज पानी बरसता रहा।
सारे भरम टूट गये जब नज़र फेर ली तुमने
जिनके बूते पे मुहब्बत का दम भरता रहा।
जा लौट जा झूठा था उसका वादा
उस आशिक से दरिया ये कहता रहा।
Friday, July 13, 2007
TANHA SHAM
Aap sab ke saamne ek aur koshish ke saath hazir hua hun... Umeed karta hun aap sab ko pasand aayegi.... Kuch apne dil ke alfaaz hai...
Apka Dost ...
---------------------------------------------------------------------------
Zindagi ki ek aur shaam akele kat gayi
...
Main khoya raha un lamho mein jinhe meri zarurat nahi...
Aasra nahi raha ab mohabbat ka meri zindagi mein,
Jiske liye jee rahe the woh kisi aur ki ho gayi...
Raah mein aise nahi socha tha kabhi akela ho jaunga main,
Thaani thi mohabbat ko apne aashiyane tak pahunchaunga main,
Gile shikwe saare door kar yaar ke saath hasti zindagi bitaunga main,
Na rishtey rahe na waade rahe zindagi adhoori reh gayi...
Mehfil mein jab liya gaya tha naam uska,
Khush tha bohot ke mera bhi naam aayega,
Hasratein kahan kisi ki poori hoti hai,
Meri hasratein bhari mehfil mein adhoori reh gayi...
Uska naam jod diya logon ne kisi aur ke naam ke saath,
Tanha kardiya fir zindagi ne chand muskurahaton ke baad,
Gile shikwa hi kare ham kisse ab tum hi batao???
woh apne aansu chupakar us naam ke saath judne chali gayi...
Nahi raha ab hausla zindagi ke imtehano ko sehna ka,
Hausla Jo deti thi woh mohabbat chali gayi...
Zindagi ki ek aur shaam akele kat gayi...
Main khoya raha un lamho mein jinhe meri zarurat nahi...
Apka Dost ...
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Zindagi ki ek aur shaam akele kat gayi
...
Main khoya raha un lamho mein jinhe meri zarurat nahi...
Aasra nahi raha ab mohabbat ka meri zindagi mein,
Jiske liye jee rahe the woh kisi aur ki ho gayi...
Raah mein aise nahi socha tha kabhi akela ho jaunga main,
Thaani thi mohabbat ko apne aashiyane tak pahunchaunga main,
Gile shikwe saare door kar yaar ke saath hasti zindagi bitaunga main,
Na rishtey rahe na waade rahe zindagi adhoori reh gayi...
Mehfil mein jab liya gaya tha naam uska,
Khush tha bohot ke mera bhi naam aayega,
Hasratein kahan kisi ki poori hoti hai,
Meri hasratein bhari mehfil mein adhoori reh gayi...
Uska naam jod diya logon ne kisi aur ke naam ke saath,
Tanha kardiya fir zindagi ne chand muskurahaton ke baad,
Gile shikwa hi kare ham kisse ab tum hi batao???
woh apne aansu chupakar us naam ke saath judne chali gayi...
Nahi raha ab hausla zindagi ke imtehano ko sehna ka,
Hausla Jo deti thi woh mohabbat chali gayi...
Zindagi ki ek aur shaam akele kat gayi...
Main khoya raha un lamho mein jinhe meri zarurat nahi...
Friday, June 22, 2007
MERI TAMANNA
कल देर रात तक क्यों मुझे जगाते रहे
मेरे दिल में हज़ारों ख़याल आते रहे
दिल हुआ तुम्हारे हाथ को चूम के किस्मत की लकीरें बदल दूं
दिल हुआ तुम्हारे साथ चाँद के मुल्क तक चल दूं
बेसबब आँखों से आँसू बहने लगे यूँ लगा दबे पाओं आए
तुम दिल में रहने लगे फिर बेसबब आँख से आँसू क्यों बहे?
क्या कहे कैसे कहे?
शाएेद तुम्हारे अल्फ़ाज़ में तुम्हे देखा तुम्हारी आमद की ख़ुशी थी
या शायद तुम्हारे खोने से डर लगता था अजीब रात थी
मुझे सोने से डर लगता था
मैं तुम्हारे सपानो के साथ जागना चाहता था
मैं सुबह की हक़ीक़तों से दूर भागना चाहता था
मैं तुम्हारे ख़यालों में रहना चाहता था
मैं बार बार तुम से कहना चाहता था
कई मैं तुम से प्यार करता हूँ
तुम्हे ही लिखता हूँ तुम को ही पढ़ता हूँ
तुम ही कश्ती की तरह बहती हो जब ये आँखें भारता हूँ
तुम कश्ती हो इसी लिए आज की रात बस रोना चाहता हूँ
ना रतज़गा चाहिए ना सोना चाहता हूँ
चँद लम्हों को मेरी हो जायो चँद लम्हों को तुम्हारा होना चाहता हूँ
अब तक तुम ने सुलझाई हैं ज़ुल्फ़ें अपनी
आज मैं वहाँ अंगुलियाँ पिरोना चाहता हूँ
आज इतनी ख़ुशी है दिल में की रोना चाहता हूं
आज तुम्हे पाना चाहता हूँ आज ख़ुद को खोना चाहता हूँ
आज की रात बस एक बार आयोगी ना?
मैं खो जाना चाहता हूँ तुम मुझे छिपयोगी ना?
आज की रात बस एक बार मुझे अपना प्यार बतायोगी ना?
आज बस एक रात मुझे लोरियाँ गा के जगयोगी ना?
मैं तुम्हारी आवाज़ के साथ जागना चाहता हूँ
बस एक आज मुझे दे दो मैं हर कल से दूर भागना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ क़यामत तक जागना चाहता हूँ
मैं तुम्हे तुम से माँगना चाहता हूँ
चँद लम्हों के लिए तुम्हे पाना चाहता हूँ
एक बार तुम्हारी बाहों में आना चाहता हूँ
एक बार तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम से पूछना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम्हे बताना चाहता हूँ
एक बार बस एक बार
-------------------------------------------------------
मेरे दिल में हज़ारों ख़याल आते रहे
दिल हुआ तुम्हारे हाथ को चूम के किस्मत की लकीरें बदल दूं
दिल हुआ तुम्हारे साथ चाँद के मुल्क तक चल दूं
बेसबब आँखों से आँसू बहने लगे यूँ लगा दबे पाओं आए
तुम दिल में रहने लगे फिर बेसबब आँख से आँसू क्यों बहे?
क्या कहे कैसे कहे?
शाएेद तुम्हारे अल्फ़ाज़ में तुम्हे देखा तुम्हारी आमद की ख़ुशी थी
या शायद तुम्हारे खोने से डर लगता था अजीब रात थी
मुझे सोने से डर लगता था
मैं तुम्हारे सपानो के साथ जागना चाहता था
मैं सुबह की हक़ीक़तों से दूर भागना चाहता था
मैं तुम्हारे ख़यालों में रहना चाहता था
मैं बार बार तुम से कहना चाहता था
कई मैं तुम से प्यार करता हूँ
तुम्हे ही लिखता हूँ तुम को ही पढ़ता हूँ
तुम ही कश्ती की तरह बहती हो जब ये आँखें भारता हूँ
तुम कश्ती हो इसी लिए आज की रात बस रोना चाहता हूँ
ना रतज़गा चाहिए ना सोना चाहता हूँ
चँद लम्हों को मेरी हो जायो चँद लम्हों को तुम्हारा होना चाहता हूँ
अब तक तुम ने सुलझाई हैं ज़ुल्फ़ें अपनी
आज मैं वहाँ अंगुलियाँ पिरोना चाहता हूँ
आज इतनी ख़ुशी है दिल में की रोना चाहता हूं
आज तुम्हे पाना चाहता हूँ आज ख़ुद को खोना चाहता हूँ
आज की रात बस एक बार आयोगी ना?
मैं खो जाना चाहता हूँ तुम मुझे छिपयोगी ना?
आज की रात बस एक बार मुझे अपना प्यार बतायोगी ना?
आज बस एक रात मुझे लोरियाँ गा के जगयोगी ना?
मैं तुम्हारी आवाज़ के साथ जागना चाहता हूँ
बस एक आज मुझे दे दो मैं हर कल से दूर भागना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ क़यामत तक जागना चाहता हूँ
मैं तुम्हे तुम से माँगना चाहता हूँ
चँद लम्हों के लिए तुम्हे पाना चाहता हूँ
एक बार तुम्हारी बाहों में आना चाहता हूँ
एक बार तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम से पूछना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम्हे बताना चाहता हूँ
एक बार बस एक बार
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MERI TAMANNAA
कल देर रात तक क्यों मुझे जगाते रहे
मेरे दिल में हज़ारों ख़याल आते रहे
दिल हुआ तुम्हारे हाथ को चूम के किस्मत की लकीरें बदल दूं
दिल हुआ तुम्हारे साथ चाँद के मुल्क तक चल दूं
आँखों से आँसू बहने लगे यूँ लगा दबे पाओं आए तुम
दिल में रहने लगे फिर बेसबब आँख से आँसू क्यों बहे?
दिल क्या कहे कैसे कहे?
शाएेद तुम्हारे अल्फ़ाज़ में तुम्हे देखा
तुम्हारी आमद की ख़ुशी थी या शायद
तुम्हारे खोने से डर लगता था
अजीब रात थी मुझे सोने से डर लगता था
तुम्हारे सपानो के साथ जागना चाहता था
मैं सुबह की हक़ीक़तों से दूर भागना चाहता था
मैं तुम्हारे ख़यालों में रहना चाहता था
मैं बार बार तुम से कहना चाहता था
की मैं तुम से प्यार करता हूँ
तुम्हे ही लिखता हूँ तुम को ही पढ़ता हूँ
तुम ही कश्ती की तरह बहती हो
जब ये आँखें भारता हूँ
तुम कश्ती हो इसी लिए आज की रात बस रोना चाहता हूँ
ना रतज़गा चाहिए ना सोना चाहता हूँ
चँद लम्हों को मेरी हो जायो चँद लम्हों को तुम्हारा होना चाहता हूँ
अब तक तुम ने सुलझाई हैं ज़ुल्फ़ें अपनी
आज मैं वहाँ अंगुलियाँ पिरोना चाहता हूँ
आज इतनी ख़ुशी है दिल में की रोना चाहता हूँ
आज तुम्हे पाना चाहता हूँ आज ख़ुद को खोना चाहता हूँ
आज की रात बस एक बार आयोगी ना?
मैं खो जाना चाहता हूँ तुम मुझे छिपयोगी ना?
आज की रात बस एक बार मुझे अपना प्यार बतायोगी ना?
आज बस एक रात मुझे लोरियाँ गा के जगयोगी ना?
मैन तुम्हारी आवाज़ के साथ जागना चाहता हूँ
बस एक आज मुझे दे दो मैं हर कल से दूर भागना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ क़यामत तक जागना चाहता हूँ
मैं तुम्हे तुम से माँगना चाहता हूँ
चँद लम्हों के लिए तुम्हे पाना चाहता हूँ
एक बार तुम्हारी बाहों में आना चाहता हूँ
एक बार तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम से पूछना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम्हे बताना चाहता हूँ
एक बार बस एक बार
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मेरे दिल में हज़ारों ख़याल आते रहे
दिल हुआ तुम्हारे हाथ को चूम के किस्मत की लकीरें बदल दूं
दिल हुआ तुम्हारे साथ चाँद के मुल्क तक चल दूं
आँखों से आँसू बहने लगे यूँ लगा दबे पाओं आए तुम
दिल में रहने लगे फिर बेसबब आँख से आँसू क्यों बहे?
दिल क्या कहे कैसे कहे?
शाएेद तुम्हारे अल्फ़ाज़ में तुम्हे देखा
तुम्हारी आमद की ख़ुशी थी या शायद
तुम्हारे खोने से डर लगता था
अजीब रात थी मुझे सोने से डर लगता था
तुम्हारे सपानो के साथ जागना चाहता था
मैं सुबह की हक़ीक़तों से दूर भागना चाहता था
मैं तुम्हारे ख़यालों में रहना चाहता था
मैं बार बार तुम से कहना चाहता था
की मैं तुम से प्यार करता हूँ
तुम्हे ही लिखता हूँ तुम को ही पढ़ता हूँ
तुम ही कश्ती की तरह बहती हो
जब ये आँखें भारता हूँ
तुम कश्ती हो इसी लिए आज की रात बस रोना चाहता हूँ
ना रतज़गा चाहिए ना सोना चाहता हूँ
चँद लम्हों को मेरी हो जायो चँद लम्हों को तुम्हारा होना चाहता हूँ
अब तक तुम ने सुलझाई हैं ज़ुल्फ़ें अपनी
आज मैं वहाँ अंगुलियाँ पिरोना चाहता हूँ
आज इतनी ख़ुशी है दिल में की रोना चाहता हूँ
आज तुम्हे पाना चाहता हूँ आज ख़ुद को खोना चाहता हूँ
आज की रात बस एक बार आयोगी ना?
मैं खो जाना चाहता हूँ तुम मुझे छिपयोगी ना?
आज की रात बस एक बार मुझे अपना प्यार बतायोगी ना?
आज बस एक रात मुझे लोरियाँ गा के जगयोगी ना?
मैन तुम्हारी आवाज़ के साथ जागना चाहता हूँ
बस एक आज मुझे दे दो मैं हर कल से दूर भागना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ क़यामत तक जागना चाहता हूँ
मैं तुम्हे तुम से माँगना चाहता हूँ
चँद लम्हों के लिए तुम्हे पाना चाहता हूँ
एक बार तुम्हारी बाहों में आना चाहता हूँ
एक बार तुम्हे अपना बनाना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम से पूछना चाहता हूँ
बहुत कुछ तुम्हे बताना चाहता हूँ
एक बार बस एक बार
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Thursday, June 21, 2007
JAB BHI HASTI HE TU
Aadaab N Namaskaar
Ghoonghat mein lukta-chhipta chand meri bechaini aur badhaye
Apne is deewane ko tu kyu door rehkar aur yu pal pal jalaye
Chain mile is dil ko agar tu ek baar mukhda apna dikhaaye....
=================================
Jab bhi hasti hai tu fir yu sharma jaati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Teri aankhe hai ya mehkashi k pyaale
Khoye in mein aese ki apna sab kuch haare
Ye samandar aesa na hai jiske koi kinaare
Neeli-2 aankhe jab bhi tu mujhse milati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Chand sa chehra tera tabassum hontho par
khil aai hai
rukhsaar ki rangat na jaane
kin phoolo se churai
hai
chuma hai jabse unhe ek ajab si khumari mujh par chhai hai
Laboo se kuch keh de agar mishri si kaano mein ghul jati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Teri wo kamar ki lachak wo tera ethlake chalnahosh bhi
le jata hai mera wo us mein val ka padna
Ab na hamein manzoor hai ek pal bhi tujhse door rehna
Apni in qaatil adao se jab bhi tu mujhe rijhati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Zindgi ki dhoop mein chalte-2 jab thak jata huteri qurbat hi mera theekana tere hi pass aata hu
tere daman mein aakar mein bada chain pata hu
Apni zulfo ki chhav mein jab tu mujhe sulaati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
In khayalo ki duniya ab tum baahar nikal aao
Wo nahi kismat mein tumhari ab to
Diggaj sambhal jao
Na rakhe ab koi umiid apne dil ko tum samjhao
Wo to hasrate kai baar yu behak jaati hai
Jab kabhi unki yaad ki badali aankho pe chha jaati hai
Ghoonghat mein lukta-chhipta chand meri bechaini aur badhaye
Apne is deewane ko tu kyu door rehkar aur yu pal pal jalaye
Chain mile is dil ko agar tu ek baar mukhda apna dikhaaye....
=================================
Jab bhi hasti hai tu fir yu sharma jaati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Teri aankhe hai ya mehkashi k pyaale
Khoye in mein aese ki apna sab kuch haare
Ye samandar aesa na hai jiske koi kinaare
Neeli-2 aankhe jab bhi tu mujhse milati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Chand sa chehra tera tabassum hontho par
khil aai hai
rukhsaar ki rangat na jaane
kin phoolo se churai
hai
chuma hai jabse unhe ek ajab si khumari mujh par chhai hai
Laboo se kuch keh de agar mishri si kaano mein ghul jati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Teri wo kamar ki lachak wo tera ethlake chalnahosh bhi
le jata hai mera wo us mein val ka padna
Ab na hamein manzoor hai ek pal bhi tujhse door rehna
Apni in qaatil adao se jab bhi tu mujhe rijhati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
Zindgi ki dhoop mein chalte-2 jab thak jata huteri qurbat hi mera theekana tere hi pass aata hu
tere daman mein aakar mein bada chain pata hu
Apni zulfo ki chhav mein jab tu mujhe sulaati hai
Sach kahu ae sanam bada kahar dhaati hai
In khayalo ki duniya ab tum baahar nikal aao
Wo nahi kismat mein tumhari ab to
Diggaj sambhal jao
Na rakhe ab koi umiid apne dil ko tum samjhao
Wo to hasrate kai baar yu behak jaati hai
Jab kabhi unki yaad ki badali aankho pe chha jaati hai
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